सोमवार, 19 अगस्त 2013

देश में महिलाओं की स्थिति


देश महिलाओं की स्थिति
भारत देश में महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं हैं। देश के कई राज्यों में महिलाओं के हालॉत झकझोर देने वाले हैं। यही कारण है कि देश में बेटी बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय, डबल्यू.एच.. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड व्यूरों, यूनिसेफ, मानव संसाधन विकास के जनगणना 2011, के आधार पर तैयार किए गए आंकड़ो के अनुसार देश में महिलाओं कि आबादी 48.4 फीसदी है।
साक्षरता और पोषाहार के मामले में पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं से अभी भी भेदभाव किया जाता है। 11 फीसदी महिलाओं को कॉलेज भेजा जाता है जबकि 15 प्रतिशत लड़कों को उच्च शिक्षा दी जाती है। आहार उपलब्ध होने के कारण 18 से कम उम्र की 90 फीसदी महिलाए एनीमिया ये पीड़ित होती हैं। गंभीर बिमारी के मामले में 22 फीसदी बेटियों को ही उपचार मिल जाता है। जबकि 70 फीसदी लडकों को उपचार प्रदान किया जाता है। देश में महिलायें फाइटर पायलट नहीं बन सकती मोर्चे पर नहीं जा सकती उन्हें फुल कमीशन प्राप्त नहीं हो सकता है।
गुजरात के मेहसाणा शहर मे सबसे बुरे हाल है।ए हजार लडकों पर सिर्फ 760 लड़कियॉं ही हैं लेकिन शिक्षा और व्यापार के मामले में गुजरात में महिलाओं की स्थिति सबसे मजबूत है।
झारखंण्ड राज्य बाल विवाह कुपोषण और बीमारी के मामले में सबसे उपर हैं। झारखण्ड में बचपन मे ही शादी कर दी जाती। सबसे ज्यादा बाल विवाह यहीं होते हैं। झारखंण्ड राज्य कुपोषण के मामले में सबसे उपर है। सबसे ज्यादा एनीमिया की शिकार 70.6 प्रतिशत महिलाएं इसी राज्य में हैं।
केरल साक्षरता और स्वास्थय के मामले में अव्वल है। केरल में महिलाओं की औसत उम्र यहां 75 साल है। साक्षरता का प्रतिशत केरल में यह 91.9 है देश में सबसे ज्यादा डॉक्टर महिलांए चंडीगढ में है। यहॉं एक हजार की आबादी पर 7.5 महिला डॉक्टर हैं। बिहार में सबसे कम 0.26 महिला डॉक्टर हैं

राजस्थान साक्षरता में पिछड़ा हुआ है। पढ़ सके ऐसी महिलाएं 52.7 प्रतिशत ही है, लेकिन सबसे ज्यादा महिला विधायक राजस्थान विधानसभा में है। यहां पर महिला विधायक 14.5 प्रतिशत हैं। नागालैंड राज्य में एक भी महिला विधायक नहीं है।
महिला अपराध के मामले में कोई राज्य किसी से कम नहीं है। दिल्ली महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य है। महिला अपराध के मामले में सबसे आगे रहते हुये यहॉं पर महिलाओं पर होने वाले कुल अपराधों में एक चौथाई यहीं होते हैं। जबकि सबसे ज़्यादा दहेज में मौतें उत्तर प्रदेश राज्य में होती है। त्रिपुरा राज्य में देश में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध होते हैं। बडे राज्यों में मध्यप्रदेश भी पीछे नहीं हैं। बलात्कार के मामले में सबसे खतरनाक असम राज्य है। यहां पिछले पांच सालों में 7164 महिलाएं बलात्कार की शिकार हुई
सबसे अच्छी स्थिति मिजोरम राज्य कि है जहॉं पर एक हजार लडको पर 971 लडकिया हैं जबकि सबसे कम अनुपात हजार लडकांे पर 830 लडकियॉ हरियाणा राज्य में है।
महिला पुरूष अनुपात मे कमी को देखते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रसव पूर्व निदान अधिनियम का कठोरता से पालन किये जाने हेतु निम्नलिखित नवीनतम दिशा निर्देश जारी किए हैं:-
1- यदि अधिनियम के अनुसार रिकार्ड नही ंपाया जाता है तो सलाहकार समितियों को मशीने जप्त करने के निर्देश दिये गये है।
2- यदि सलाहकार समिति यह पाती है कि अधिनियम के नियमो का उल्लंघन किया गया तो वह राज्य चिकित्सा परिषद को सूचित कर अल्ट्रासांउड क्लिनिक के पंजीकरण को निलंबित करने और डॉक्टर का लाइसेंस रद्द करने की अनुसंशा करेगी
3- अधिकारीगण यह देखेंगे कि सभी अनुवांशिक प्रयोगशाला अनुवांशिक क्लिनिक बांझपन क्लिनिक में प्रसवपूर्व निदान तकनीक और प्रक्रियाओ का उपयोग अधिनियम के अंतर्गत बनाये गये प्रावधानो के अनुसार हो रहा है उनके सभी रिकार्ड रखे जा रहे है
4- राज्य सलाहकार समिति यह भी देखेगी कि रिकार्ड की प्रतिलिपियां नियम 9-8 के अनुसार सभी जिले के अधिकारी को भेजी जा रही है
5- सलाहकार बोर्ड यह भी देखेगा कि अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन के निर्माता और विक्रेता ने किसी अपंजीकृत केन्द्र को मशीन बेची है तो उसकी तत्काल सूचना सरकार को दी जायेगी
इस संबंध में केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जगरूकता हेतु महिलाओं के सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण के कार्यक्रम प्रारंभ किये जाने और रोकधाम के लिए निम्नलिखित दिशा निर्देश जारी किये-
1- अधिनियम के अंतर्गत निर्मित केन्द्रीय सुपरवाइजरी बोर्ड और सलाहकार समिति की इस संबंध में नियमित बैठक होगी
2- पूर्व गर्भाधान पूर्व प्रसव निदान तकनी लिंग चयन प्रतिषेध अध्ाििनयम 1994के अंतर्गत एंव पी.सी.एण्ड पी.एन.डी.टी. नियम 1996 के नियम 11-2 के अंतर्गत अपंजीकृत मशीन रखने एंव अधिनियम में स्वयं को पंजीकृत कराने की दशा में सजा एंव मशीन जप्ती के प्रावधान किये गये है इस संबंध में संशोधन की अनुसंशा की गई है
3- पी.एन.डी.टी. अधिनियम के उल्लंघन के खिलाफ निगरानी हेतु राज्य और जिला स्तर पर समिति बनाने का निर्णय लिया गया है राष्ट्रीय निरीक्षण एंव निगरानी समिति भी बनाई गई है।
4- राष्ट्रीय निरीक्षण एंव निगरानी समिति (एन0आई0एम0सी0) राज्य और संघ राज्य देशों में अल्ट्रासांउड क्लिनिकों को अचानक निरीक्षण करेगी
5- राष्ट्रीय निरीक्षण एंव निगरानी समिति यदि किसी संगठन को निरीक्षण के दौरान कानून के उल्लंघन का दोषी पाती है तो उसके खिलाफ कार्यवाही का अधिकार उसंे दिया गया है
6- अधिनियम के प्रभावी क्रियावयन हेतु चिकित्सा अधिकारी और न्यायपालिका के लिये संवेदनशील और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे
7- फ्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया और गैर सरकारी संगठनो की सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से बडे पैमाने पर मीडिया जागरूकता अभियान चलाया जायेगा जिसमें बडे पैमाने पर सूचना, शिक्षा एंव प्रचार प्रसार गतिविधियां शुरू की जायेगी
उमेश कुमार गुप्ता










balkanunumeshgupta

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

बालक संबंधी विधि

                           बालक संबंधी विधि
1--संविधान में बच्चों से संबंधित विशेष प्रावधान
2---निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम
3---बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006
4---बाल मजदूरी
5-बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005
6--किशोर न्याय ( बालकों की देख-रेख तथा संरक्षण) अधिनियम 2000 एंव मध्य प्रदेश किशोर न्याय (बालको की देखरेख और संरक्षण) नियम, 2003 में बालको के कल्याण संबंधी दिये गये विशेष प्रावधान-
7---लापता बच्चों के संबंध में मान्नीय उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश
8-किशोर न्याय
9-किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख तथा संरक्षण)  अधिनियम 2000 एंव उसके नियमों के अधीन आयु निर्धारण













बुधवार, 14 अगस्त 2013

बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005

बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005

                                              बालक अधिकारो के संरक्षण के बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आयोग की स्थापना की गई है जिसका उद्देश्य बालाको के विरूद्ध अपराधो या बालक अधिकारो के अतिक्रमण के त्वरित विचारण के लिए बालक न्यायालयो के गठन तथा इसे संबंधित और उसके आनुवंशिक विषयों का उपबंध करना है।

                                                    अधिनियम मंे संयुक्त राष्ट महासभा के शिखर सम्मेलन में बालको के लिए उपयुक्त विश्व नामक दस्तावेज को स्वीकार किया है । जिसमें वर्तमान दशक के लिए सदस्य देशो द्वारा अपनाए जाने वाले लक्ष्य उद्देश्य युक्तियां और क्रियाकलाप अंतर्विष्ट है । और यह समीचीन है कि इस संबंध में सरकार द्वारा अंगीकृत नीतियांे, बालक अधिकार संबंधी अधिसमय में विहित मानको और अन्य सभी सुसंगत अन्तरराष्ट्रीय लिखतो को कार्यान्वित करने के लिए बालको से संबंधित विधि अधिनियमित की जाए।

                                         अधिनियम के अनुसार केन्द्र सरकार अधिनियम की धारा-3 के अंतर्गत राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य सरकार अधिनियम की धारा-17 के अंतर्गत राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग का गठन करेगी।\

        जिनका कार्य अधिनियम की धारा-13 के अनुसार निम्नलिखित होगा-

    1-    बालक अधिकारो के संरक्षण के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन उपबंधित रक्षोपायो की परीक्षा और पुनर्विलोकन करना तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उपायो की सिफारिश करना ।

    2-    केन्द्रीय सरकार को वार्षिक रूप से ओर ऐसे अन्य अंतरालो पर जिन्हे आयोग उचित समझे उन रक्षापायो के कार्यकरण पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना ।

    3-     बालक अधिकारो के अंतिक्रमण की जांच करना और ऐसे मामलो में कार्यवाहिया आंरभ करने की सिफारिश करना । 

    4-    उन सभी पहलुओ की परीक्षा करना जो आंतकवाद सांप्रदायिक हिंसा , दंगे, प्राकृतिक आपदा, घरेलू हिंसा, एचआईवी/एडस अवैध व्यापार, दुव्र्यवहार उत्पीडन और शोषण अश्लील साहित्य और वेश्यावृत्ति से प्रभावित बालक अधिकारो के उपयोग को रोकते है और समुचित उपचारी उपायो की सिफारिश करना ।

    5-    उन बालको से जिन्ह विशेष देख-रेख और संरक्षण की आवश्यकता है जिनके अंतर्गत कष्टो से पीडित बालक तिरस्कृत और असुविधाग्रस्त बालक, विधि का उल्लंघन करने वाले बालक, किशोर, कुटुम्ब रहित बालक और कैदियो के बालक भी हे । संबंधित मामलो की जांच पडताल करना और उपयुक्त उपचारी उपायो की सिफारितश करना ।

    6-    बालक अधिकारो से संबंधित संधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय  लिखतो का अध्ययन करना और विद्यमान नीतियों कार्यक्रमों और अन्य क्रिया कलापो का कालिक पुनर्विलोकन करना तथा बालको के सर्वोत्तम हित में उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सिफारिश करना ।

    7-    बालक अधिकारो के क्षेत्र में अनुसंधान करना और उसे अग्रसर करना।

    8    समाज के विभिन्न वर्गो के बीच बालक अधिकार सबंधी जानकारी का प्रसार करना और प्रकाशनो मीडिया, विचार गोष्ठियों और अन्य उपलब्ध साधनो के माध्यम से इन अधिकारो के संरक्षण के लिए उपलब्ध रक्षापायो के प्रति जागरूकता का संवर्धन करना ।

    9-    केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी के नियंत्रणाधीन किसी किशोर अभिरक्षागृह या किसी अन्य निवास स्थान या बालको के लिए बनाई गई संस्था जिसके अंतर्गत किसी सामाजिक संगठन द्वारा चलाए जाने वाली संस्था भी है का निरीक्षण करना या करवाना, जहां बालको कोउपचार, सुधार या संरक्षण के प्रयोजनो के लिए निरूद्ध किया जाता है या रखा जाता है निरीक्षण करना या करवाना और किसी उपचारी कार्रवाई के लिए यदि आवश्यक हो संबंधित प्राधिकारियो से बातचीत करना ।

    10-    निम्नलिखित से संबंधित मामलो के परिवादो की जांच करना और इन मामलो पर स्वप्रेरणा से विचार करना-

    अ-    बालक अधिकारो से वचन और उनका अतिक्रमण

    ब-    बालको के संरक्षण और विकास के लिए उपबंध करने वाली विधियों का अक्रियान्वयन

    स-    बालको की कठिनाइयों को दूर करने ओरबालको के कल्याण को सुनिश्चित करने तथा ऐसे बालको को अनुतोष प्रदान करने के उददेश्य के लिए नीतिगत विनिश्चियो मार्गदर्शनो या अनुदेशो का अनुुपालक या ऐसे विषयो से उदभूत मुददेो पर समुचित पदाधिकारियो के साथ बातचीत
करना और 

    11-    ऐसे अन्य कृत्य करना जो बालको के अधिकारो  के संवर्धन और उपर्युक्त कृत्यो से आनुषंगिक किसी अन्य मामलो के लिए आवश्यक समझे जाए ।

2-        आयोग ऐसे किसी मामले की जांच नहीं करेगा जो किसी राज्य आयोग या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन सम्यक रूप से गठित किसी अन्य आयोग के समक्ष लंबित है । 

                                   अधिनियम की धारा-25 के अंतर्गत राज्य सरकार बालको के विरूद्ध अपराधो या बालक अधिकारो के अतिक्रमण के अपराधो का त्वरित विचारण करने का उपबध करने के प्रयोजन के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से अधिसूचना द्वारा उक्त अपराधो का विचारण करने के लिए राज्य में कम से कम एक न्यायालय को प्रत्येक जिले में किसी सेशन न्यायालय को बालक न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकेगी । इसी के अंतर्गत लैगिक अपराधो से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 की रचना की गई है ।
   


बालक श्रम प्रतिषेध और विनियम अधिनियम 1986 बाल मजदूरी

                          बाल मजदूरी


1- बच्चो से मजदूरी कराना बाल मजदूरी कहलाता है
2- बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है बच्चों सेकाम करवाने पर सजा
हो सकती है
3- सामान्यतयह देखा गया हे किबाल मजदूरो से काम कराने के बाद भी उन्हें
कम मजदूरी दी जाती हैया फिर मामूली सी मजदूरी दी जाती है और उन
बाल मजदूरो का जोखिम भरे कार्यो से इस्तमाल भी किया जाता है
इस कानून के तहत बच्चों को 15वां साल लगने से पहल किसी ज्ञी फैक्टृी में काम
पर नहीं रखा जा सकता बच्चों कोनीचे लिखे कार्यो केलिये नहीं रखा जा सकता
1- रेलगाड़ी से यात्री सामान या डाक लेजाने के लिये
2- रेल्वे स्टेशन की सीमा मे भवन बनाने के लिये
3- रेल्वे स्टेशनमेंचाय खाने पीने केसामान की दुकान पर जहां एक दूसरे
प्लेटफार्म पर बार बार आना जाना पड़ता है
4- रेल्वे स्टेशन या रेल लाईन बनाने के काम के लिये
5- बंदरगाहपर किसी भी तरह केकाम के लिये
6- अल्कालीन (टेम्परेरी) लाईसंेस वाली पटाखों की दुकानो में पटाखें बेंचने के
काम के लिये
7- किसी भी घर ,दुकान आदि में पानी ढोने के लिये
8- जलाने के ईधन एकत्रित करने के लिये
9- खेत जोतने के लिये

इन कार्यो में भी बच्चो का लगाना मना है
1- बीड़ी बनाने का काम
2- गलीचें बनाने का काम
3- सीमेंट कारखाने में सीमेंट बनाना या थेलों में भरना
4- कपड़ा बुनाई छपाई या रंगाई का कार्य करवाना
5- माचिस पटाखे या बारूद बनाना
6- अभ्रक काटना या तोड़ना
7- चमड़ा या लाख बनाना
8- कांच तथा चूडियो की फेक्टृरी मेंकाम करना
9- साबुन बनाना
10- चमड़े की पीटाई रंगाई या सिलाई कराना
11- उन या रूई की सफाई घुनाई कराना
12- मकान,सड़क,बांध आदि बनाना
13- स्लेट पेंसिल बनाना पैक बंद करना
14- गोमेद या कांच की मलाऐं या वस्तुऐ बनाना
15- कोई सेा काम जिसमें लैड, पारा ,मैगनीज ,क्रोमियम,अरगजी,पेक्सीन,कीटनाशक
इबाई और एस्बेस्टस जैसे जहरीले धातु ओर पदार्थ उपयोग में लाये जाते हों
16- पत्थर तोड़ने या सड़क बनाने का काम कराना
17- किसी बगान आदि में काम कराना
बच्चों को किन-किन शर्तो पर काम करने के लिये कानून इजाजत देता है ?
केवल 14 से 18 उम्र के बच्चे ही फेक्टृीयों में काम कर सकते हैं लेकिन -
1- बच्चों से 6 घंटे से अधिक समय तक काम नही करवायाजा सकता है।
2- एक साथ बच्चों से चार घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता
3- रात के 10 बजे से लेकर सुबह आठ जे की बीच में उनसे कोई भी काम
नहीं लिया जा सकता है
4- बच्चों से ज्यादा ज्यादा दो शिफटों में काम करवाया जा सकता है
5- सप्ताह में एक दिनकी छुट्टी अनिवार्य है

बच्चोकी सुरक्षाके लिये कानून में क्या प्रावधान है?
बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिये कारखाना अधिनियम 1948 में कुछ प्रावधान कियेगये हैं जिनमें से खास यह है -
1- 14 साल कम उम्र के बच्चों को किसी भी कारखाने में काम की इजाजत
नही है यानि 15वां साल लगने से पहले बच्चों को काम पर नहीं रखा जा
सकता कारखाना अधिनियम 1948 ने कारखानों में बच्चों से काम लेने पर
रोक लगाई है
2- 14 से 18 साल के बीच के उम्र के अवयस्क बच्चों को कारखाने मं काम
करने दियाजा सकता है
3- एक दिन में केवल एक ही कारखाने में उनसे काम करवाया जा सकता है










































         

 माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा एम.सी. मेहता

 बनाम तमिलनाडू सिविल रिट याचिका क्रमांक-

465/86 में बाल श्रम उन्मूलन के संबंध में दिशा-निर्देश

 जारी किये गये थे जो निम्नलिखित हैंः-


1. काम करने वाले बच्चों की पहचान के लिये सर्वेक्षण किया जाए।
2. खतरनाक उद्योग में काम कर रहे बच्चों की वापसी हो उन्हें

 उचित शिक्षा संस्थान में शिक्षित किया जाये। 
 
3. बाल कल्याण बवदजतपइनजपवद / त्ेण् 20000 की स्थापना 


की गयी है जिसमें प्रति बच्चे के हिसाब से नियोक्ता द्वारा भुगतान

 किया जाये।
 
4. बच्चों के परिवार के व्यस्क सदस्य को रोजगार किया जायेगा। 
 
5. राज्य सरकार कल्याण कोष में येगदान देगी। 
 
6. बच्चों के परिवार को वित्तीय सहायता दी जायेगी। 
 
7. गैर खतरनाक व्यवसाय मे बच्चों को काम पर नहीं लिया जायेगा। 
 
                                                मान0 उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश के अनुरूप वर्ष 2006 में बाल श्रम निषेध कानून की स्थापना की गयी जिसमें 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी काम धंधों में नहीं लगाया जायेगा। 


 बालक श्रम प्रतिषेध और विनियम अधिनियम 1986

 
                                                               हमरे देश में बाल मजदूरी

 आम बात है । देश में करोडो बच्चे पढने की उम्र में बोझा ढोते हैं 
। कारखाना, फैक्ट्री, में खतरनाक काम करते हैं । जबकि बाल 

मजदूरी को बालक श्रम प्रतिषेध और विनियमन अधिनियम 1986 

 की धारा-14 में अपराध घोषित कर उसे दण्डित किया गया है । 
 
                                                  इस अधिनियम के अंतर्गत बच्चो को 
 15वां साल लगने से पहले किसी भी फेक्ट्री में काम पर नहीं रखा 

जा सकता । उनसे रेलवे स्टेशन, बंदरगाह, कारखाने, उद्योग धंधे

 जहां पर खतरनाक रसायन और कीटनाशक निकलते हैं । वहा पर 

उन्हें काम पर नहीं लगाया जा सकता है

                                   केवल 14 से 18 साल की उम्र के बच्चे को ही फैक्ट्रियो मंे 6 घंटे काम पर लगाया जा सकता है । जिसमें उनसे एक बार में चार घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता है । रात के 10 बजे से लेकर सुबह 8 बजे के बीच में उनसे कोई भी काम नहीं करवाया जायेगा । उन्हें सप्ताह में एक दिन छुटटी अवश्य दी जायेगी ।

                                                  उनकी सुरक्षा के विशेष इंतजाम कारखाना अधिनियम 1948 के अनुसार किये जाएगें ।जब से बच्चो को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है तब से 18 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को काम करने की इजाजत नही दी जानी चाहिए।

 
                                                               माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भारत 

में सर्कस में बाल कलाकार का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है।

                                    हमारे देश में सर्कस लोकप्रिय है और सर्कस में बच्चे काम करते थे इस संबंध में मान0 उच्चतम न्यायालय के द्वारा 14 वर्ष से कम उम्र के बाल कलाकारों को उपयोग करने से सर्कस मालिकों पर प्रतिबंध लगा दिया। यह देखा गया कि सर्कस में अव्यस्क बच्चों को उनकी मर्जी के खिलाफ दिन में 5 बार प्रदर्शन के लिये मजबूर किया जाता था और सर्कस के लिये बच्चो की तस्करी की जाती थी। सर्कस में उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता था। इसे बालश्रम माना गया। 

 
इस संबंध में बचपन बचाओं आंदोलन विरूद्ध भारत संघ सिविल याचिका क्रमांक-51/2006 में निम्नलिखि दिशा-निर्देश जारी किये गयेः-

1. 14 वर्ष से कम उम्र के बाल कलाकार सर्कस में काम नहीं करेंगे। 
 
2. सर्कस में काम कर रहे अव्यस्क बच्चों को दिन में पांच बार प्रदर्शन के लिये मजबूर नहीं किया जायेगा। 
 
3. प्रत्येक राज्य सरकार किशोर घरों की अर्द्ध वर्षिक रिपोर्ट प्राप्त करेगी जिसमें बच्चों की संख्या, स्थिति, पुर्नवास और वर्तमान स्थिति का उल्लेख होगा। इसके लिये राज्य सरकार प्रत्येक जिले में किशोर न्याय सेल खोलेगी। 
 
4. 24 घण्टे घरों में चलने वाले सभी गैर सरकारी संगठनों का जिला कलेक्टर में पंजीकरण होगा उनके नाम पते सहित पूर्व विवरण, पदाधिकारियों के नाम, मोबाइल नम्बर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किये जाएॅगे इसका एक डेटाबेट तैयार किया जायेगा। 
 
5. सड़क किनारे ढाबे (भोजनालय) और मैकेनिक की दुकानों में काम करने वाले बच्चों को बचाने और उनका पुनर्वास करने में एक मजिस्ट्र्ेट की नियुक्ति, जिला मजिस्ट्र्ेट द्वारा की जायेगी। जिसके द्वारा ऐसे बच्चों की बचाव और निगरानी करने के निर्देश दिये जायेंगे।
6. केन्द्रीय दत्तक ग्रहण रिसोर्स एजेन्सी द्वारा अपनी वार्षिक रिपोर्ट परिवारसमाज कल्याण को दी जायेगी।
7. समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत केन्द्र और राज्य सरकार अर्द्धवार्षिक रणनीति योजना तैयार करेगी।
8. प्रत्येक राज्य सरकार को बच्चों के संबंध में योजनाओं के कार्यान्वयन के लिये जिम्मेदार बताया गया बाल कल्याण समितियों को जिला जज की देखरेख में रखने की सिफारिश की गयी है। 
 
9. घरों में बच्चों की अच्छी देख भाल हो इसके लिये पालक ध्यान-योजना की सिफारिश की गयी है। 
 
10. केन्द्र सरकार बच्चों के लाभ और कल्याण के लिये एक स्वतंत्र प्राधिकरण बनायेगी, जिससे आवंटित धन का वास्तव में बच्चों के कल्याण के लिये उपयोग होगा।