मंगलवार, 13 अगस्त 2013

बालक श्रम प्रतिषेध और विनियमन अधिनियम 1986



                                                   बालमजदूरी

                        बालक श्रम प्रतिषेध और विनियमन अधिनियम 1986 
 
                                                               हमरे देश में बाल मजदूरी आम बात है । देश में करोडो बच्चे पढने की उम्र में बोझा ढोते हैं । कारखाना, फैक्ट्री, में खतरनाक काम करते हैं । जबकि बाल मजदूरी को बालक श्रम प्रतिषेध और विनियमन अधिनियम 1986 की धारा-14 में अपराध घोषित कर उसे दण्डित किया गया है । 
 
                                                  इस अधिनियम के अंतर्गत बच्चो को 15वां साल लगने से पहले किसी भी फेक्ट्री में काम पर नहीं रखा जा सकता । उनसे रेलवे स्टेशन, बंदरगाह, कारखाने, उद्योग धंधे जहां पर खतरनाक रसायन और कीटनाशक निकलते हैं । वहा पर उन्हें काम पर नहीं लगाया जा सकता है

                                   ैकेवल 14 से 18 साल की उम्र के बच्चे को ही फैक्ट्रियो मंे 6 घंटे काम पर लगाया जा सकता है । जिसमें उनसे एक बार में चार घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता है । रात के 10 बजे से लेकर सुबह 8 बजे के बीच में उनसे कोई भी काम नहीं करवाया जायेगा । उन्हें सप्ताह में एक दिन छुटटी अवश्य दी जायेगी ।

                                                  उनकी सुरक्षा के विशेष इंतजाम कारखाना अधिनियम 1948 के अनुसार किये जाएगें ।जब से बच्चो को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है तब से 18 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को काम करने की इजाजत नही दी जानी चाहिए।




 बच्चों कोनीचे लिखे कार्यो केलिये नहीं रखा जा सकता
1- रेलगाड़ी से यात्री सामान या डाक लेजाने के लिये
2- रेल्वे स्टेशन की सीमा मे भवन बनाने के लिये
3- रेल्वे स्टेशनमेंचाय खाने पीने केसामान की दुकान पर जहां एक दूसरे
प्लेटफार्म पर बार बार आना जाना पड़ता है
4- रेल्वे स्टेशन या रेल लाईन बनाने के काम के लिये
5- बंदरगाहपर किसी भी तरह केकाम के लिये
6- अल्कालीन (टेम्परेरी) लाईसंेस वाली पटाखों की दुकानो में पटाखें बेंचने के
काम के लिये
7- किसी भी घर ,दुकान आदि में पानी ढोने के लिये
8- जलाने के ईधन एकत्रित करने के लिये
9- खेत जोतने के लिये

इन कार्यो में भी बच्चो का लगाना मना है

1- बीड़ी बनाने का काम
2- गलीचें बनाने का काम
3- सीमेंट कारखाने में सीमेंट बनाना या थेलों में भरना
4- कपड़ा बुनाई छपाई या रंगाई का कार्य करवाना
5- माचिस पटाखे या बारूद बनाना
6- अभ्रक काटना या तोड़ना
7- चमड़ा या लाख बनाना
8- कांच तथा चूडियो की फेक्टृरी मेंकाम करना
9- साबुन बनाना
10- चमड़े की पीटाई रंगाई या सिलाई कराना
11- उन या रूई की सफाई घुनाई कराना
12- मकान,सड़क,बांध आदि बनाना
13- स्लेट पेंसिल बनाना पैक बंद करना
14- गोमेद या कांच की मलाऐं या वस्तुऐ बनाना
15- कोई सेा काम जिसमें लैड, पारा ,मैगनीज ,क्रोमियम,अरगजी,पेक्सीन,कीटनाशक
इबाई और एस्बेस्टस जैसे जहरीले धातु ओर पदार्थ उपयोग में लाये जाते हों
16- पत्थर तोड़ने या सड़क बनाने का काम कराना
17- किसी बगान आदि में काम कराना
बच्चों को किन-किन शर्तो पर काम करने के लिये कानून इजाजत देता है ?
 केवल 14 से 18 उम्र के बच्चे ही फेक्टृीयों में काम कर सकते हैं लेकिन -
1- बच्चों से 6 घंटे से अधिक समय तक काम नही करवायाजा सकता है।
2- एक साथ बच्चों से चार घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता
3- रात के 10 बजे से लेकर सुबह आठ जे की बीच में उनसे कोई भी काम
नहीं लिया जा सकता है
4- बच्चों से ज्यादा ज्यादा दो शिफटों में काम करवाया जा सकता है
5- सप्ताह में एक दिनकी छुट्टी अनिवार्य है

बच्चोकी सुरक्षाके लिये  प्रावधान है
बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिये कारखाना अधिनियम 1948 में कुछ प्रावधान कियेगये हैं जिनमें से खास यह है -
1- 14 साल कम उम्र के बच्चों को किसी भी कारखाने में काम की इजाजत
नही है यानि 15वां साल लगने से पहले बच्चों को काम पर नहीं रखा जा
सकता कारखाना अधिनियम 1948 ने कारखानों में बच्चों से काम लेने पर
रोक लगाई है
2- 14 से 18 साल के बीच के उम्र के अवयस्क बच्चों को कारखाने मं काम
करने दियाजा सकता है
3- एक दिन में केवल एक ही कारखाने में उनसे काम करवाया जा सकता है


माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भारत में सर्कस में बाल कलाकार का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है। हमारे देश में सर्कस लोकप्रिय है और सर्कस में बच्चे काम करते थे इस संबंध में मान0 उच्चतम न्यायालय के द्वारा 14 वर्ष से कम उम्र के बाल कलाकारों को उपयोग करने से सर्कस मालिकों पर प्रतिबंध लगा दिया। यह देखा गया कि सर्कस में अव्यस्क बच्चों को उनकी मर्जी के खिलाफ दिन में 5 बार प्रदर्शन के लिये मजबूर किया जाता था और सर्कस के लिये बच्चो की तस्करी की जाती थी। सर्कस में उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता था। इसे बालश्रम माना गया। 

 
इस संबंध में बचपन बचाओं आंदोलन विरूद्ध भारत संघ सिविल याचिका क्रमांक-51/2006 में निम्नलिखि दिशा-निर्देश जारी किये गयेः-

1. 14 वर्ष से कम उम्र के बाल कलाकार सर्कस में काम नहीं करेंगे।
2. सर्कस में काम कर रहे अव्यस्क बच्चों को दिन में पांच बार प्रदर्शन के लिये मजबूर नहीं किया जायेगा।
3. प्रत्येक राज्य सरकार किशोर घरों की अर्द्ध वर्षिक रिपोर्ट प्राप्त करेगी जिसमें बच्चों की संख्या, स्थिति, पुर्नवास और वर्तमान स्थिति का उल्लेख होगा। इसके लिये राज्य सरकार प्रत्येक जिले में किशोर न्याय सेल खोलेगी।
4. 24 घण्टे घरों में चलने वाले सभी गैर सरकारी संगठनों का जिला कलेक्टर में पंजीकरण होगा उनके नाम पते सहित पूर्व विवरण, पदाधिकारियों के नाम, मोबाइल नम्बर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किये जाएॅगे इसका एक डेटाबेट तैयार किया जायेगा।
5. सड़क किनारे ढाबे (भोजनालय) और मैकेनिक की दुकानों में काम करने वाले बच्चों को बचाने और उनका पुनर्वास करने में एक मजिस्ट्र्ेट की नियुक्ति, जिला मजिस्ट्र्ेट द्वारा की जायेगी। जिसके द्वारा ऐसे बच्चों की बचाव और निगरानी करने के निर्देश दिये जायेंगे।
6. केन्द्रीय दत्तक ग्रहण रिसोर्स एजेन्सी द्वारा अपनी वार्षिक रिपोर्ट परिवारसमाज कल्याण को दी जायेगी।
7. समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत केन्द्र और राज्य सरकार अर्द्धवार्षिक रणनीति योजना तैयार करेगी।
8. प्रत्येक राज्य सरकार को बच्चों के संबंध में योजनाओं के कार्यान्वयन के लिये जिम्मेदार बताया गया बाल कल्याण समितियों को जिला जज की देखरेख में रखने की सिफारिश की गयी है।
9. घरों में बच्चों की अच्छी देख भाल हो इसके लिये पालक ध्यान-योजना की सिफारिश की गयी है।
10. केन्द्र सरकार बच्चों के लाभ और कल्याण के लिये एक स्वतंत्र प्राधिकरण बनायेगी, जिससे आवंटित धन का वास्तव में बच्चों के कल्याण के लिये उपयोग होगा। 

माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडू सिविल रिट याचिका क्रमांक-465/86 में बाल श्रम उन्मूलन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये गये थे जो निम्नलिखित हैंः-
1. काम करने वाले बच्चों की पहचान के लिये सर्वेक्षण किया जाए।
2. खतरनाक उद्योग में काम कर रहे बच्चों की वापसी हो उन्हें उचित शिक्षा संस्थान में शिक्षित किया जाये।
3. बाल कल्याण बवदजतपइनजपवद / त्ेण् 20000 की स्थापना की गयी है जिसमें प्रति बच्चे के हिसाब से नियोक्ता द्वारा भुगतान किया जाये।
4. बच्चों के परिवार के व्यस्क सदस्य को रोजगार किया जायेगा।
5. राज्य सरकार कल्याण कोष में येगदान देगी।
6. बच्चों के परिवार को वित्तीय सहायता दी जायेगी।
7. गैर खतरनाक व्यवसाय मे बच्चों को काम पर नहीं लिया जायेगा। 
 
मान0 उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश के अनुरूप वर्ष 2006 में बाल श्रम निषेध कानून की स्थापना की गयी जिसमें 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी काम धंधों में नहीं लगाया जायेगा।
 
1- बच्चो से मजदूरी कराना बाल मजदूरी कहलाता है
2- बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है बच्चों सेकाम करवाने पर सजा
हो सकती है
3- सामान्यतयह देखा गया हे किबाल मजदूरो से काम कराने के बाद भी उन्हें
कम मजदूरी दी जाती हैया फिर मामूली सी मजदूरी दी जाती है और उन
बाल मजदूरो का जोखिम भरे कार्यो से इस्तमाल भी किया जाता है
इस कानून के तहत बच्चों को 15वां साल लगने से पहल किसी ज्ञी फैक्टृी में कामपर नहीं रखा जा सकता

बालकों एवं महिला कल्याण संबंधी योजनाएं

मध्य प्रदेश सरकार की बालकों एवं महिला कल्याण संबंधी योजनाएं
 
उमेश कुमार गुप्ता
मध्य प्रदेश सरकार ने महिला एवं बालकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं बनाई हैं जिसमें लाडो अभियान, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना , उषाकिरन योजना आदि महत्वपूर्ण हैं ।
1 लाडो अभियान-
मध्य प्रदेश सरकार ने वाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006की रचना की है जिसके अनुसार 18 वर्ष सेकम आयु में लड़की तथा 21 वर्ष से कम उम्र में लड़के का विवाह करना कानूनी अपराध है । ऐसे विवाह में शामिल होने वाले सभी व्यक्ति अपराध की श्रेणीमें आते हें । वाल विवाह करने और करवाने वाले को दो वर्ष तक का कठोर कारावास या एक लाख रूपये तकका जुर्माना या दोनो हो सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा बाल विवाह न रचे ,अपराध से बचे बेटियों को पढ़ने व आगे बढ़ने का मोका दें ।इसके लिए लाडो अभियान चलाया जिसमें महिला और बच्चों को मध्य प्रदेश शासन द्वारा चलाई जा रही समस्त योजनाओं का लाभ दिलाने समस्त जिला कलेक्टर या महिला विकास विभाग केअधिकारी को अधिकृत किया गया है । प्रत्येक व्यक्ति ,अपने आस पास वाल विवाह होता पाये तो इसकी सूचना इन अधिकारियों को दे सकता है ।

2 मध्य प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री कन्यादान योजना
0 प्र0 सरकार के द्वारा गरीब, जरूरत ,निर्धन, निराश्रित परिवारो तथा श्रमिक संवर्ग के अन्तर्गत पंजीकृत हितग्राही परिवारों की विवाह योग्य कन्याओं ,विधवा
तथा परित्यक्ता के विवाह के लिये एक मंगल पहल प्रारंभ की गई।
इस मुख्य मंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत हर कन्या को विवाह के समय
13 हजार रूपये की गृहस्थी,सामग्री निशक्त कन्या को 25 हजार तथा वर-वधु दोनो के निशक्त होने पर 50 हजार रूपये अतिरिक्त अनुदान दिया जाता है, इस अभिनव योजना में अबतक निर्धन परिवारों की 2,29,680 बेटियों का कन्यादान किया गया है । जिस पपर अबतक 245 करोड रूपये व्यय हो चुके हैं । यह योजना एक अप्रेल 2006 से प्रारंभ हुई है ।
3 लाड़ली लक्ष्मी योजना

प्रदेश में बालिकाओं के शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाने, अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने, बालिका भ्रूण हत्या रोकने और बालिकाओं के जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच लाने एवं बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से लाड़ली लक्ष्मी योजना आरंभ की गई। योजना 1 जनवरी 2006 के उपरांत जन्मी बालिकाओं के लिए है।
योजना के मध्य अर्थात 21 वर्ष की आयु पूर्ण बालिका के आवेदन पर उस दिनांक तक देय राशि का समय पूर्व भुगतान किया जावेगा किंतु शर्त यह होगी कि बालिका की आयु 18 वर्ष की हो कक्षा 12 वीं की परीक्षा में सम्मिलित हो एवं 18 वर्ष उपरांत उसका विवाह हुआ हो।
योजना का लाभ कौन ले सकता हैः-ऐसी बालिकांए-जिनके माता पिता
1 मध्य प्रदेश के मूल निवासी हों
2 आयकर दाता न हों।
3 द्वितीय बालिका के प्रकरण में आवेदन करने से पूर्व परिवार नियोजन
अपना लिया हो।
4 प्रथम प्रसव की प्रथम बालिका जिनका जन्म 01.04.2008 क उपरांत परिवार नियोजन कि
शर्त यथावत।
5 हितग्राही की आंगनवाड़ी केन्द्र में उपस्थित नियमित हो।
6 जिस परिवार में अधिकतम दो संतान हों माता/पिता की मृत्यु हो गई हो, उस परिवार के लिये परिवार नियोजन की शर्त अनिवार्य नहीं होगी, परंतु माता अथवा पिता का मृत्यृ प्रमाण पत्र आवश्यक होगा।
7 जिस परिवार में प्रथम बालक अथवा बालिका है तथा दूसरे प्रसव पर दो जु़ड़वा बच्चियां
जन्म लेती हैं तो, जुड़वा बच्चियों को इस योजना का लाभ दिया जावेगा।
8 यदि परिवार ने अनाथ बालिका को गोद लिया हो तो उसे प्रथम बालिका मानते हुए योजना का लाभ दिया जावेगा।
इस योजना का लाभ लेने के लिये अपने गांव/ मोहल्ले या समीप की आंगनवाड़ी केन्द्र में संपर्क कर आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र के साथ निर्धारित समस्त दस्तावेज संलग्न करने होंगे। अनाथ बालिका की दशा में संबंधित अनाथालय/ संरक्षण गृह के अधीक्षक द्वारा बालिका के अनाथालय में प्रवेश के 1 वर्ष के अंदर तथा बालिका की आयु 6 वर्ष होने के पूर्वसंबंधित परियोजना अधिकारी को आवेदन करना होगा।
4.समेकित बाल विकास परियोजना
मध्य प्रदेश सरकार ने बच्चों मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नीव डालने एवं बाल विकास को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न विभागों के बीच नीति तथा मार्गदर्शन में प्रभावशाली समन्वय मेल-जोल स्थापित करने समेकित बाल विकास परियोजना सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में स्थापित की जाएंगी । जहां पर 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती, धात्री, ;केवल 6 माह तक दूध पिलाने वालीद्ध महिलाओं को निम्नलिखित 6 प्रकार की सेवायें दी जाती है।

1. अनौपचारिक शिक्षा 3 से 6 वर्ष तक क बच्चों के लिए।
2. टीकाकरण शिक्षा सभी बच्चे व गर्भवती महिलाओं के लिए।
3. पूरक पोषण आहार 6 माह से 6 वर्ष क बच्चे, गर्भवती, धात्री के लिए।
4. स्वास्थ्य जाॅंच सभी बच्चे, गर्भवती, एवं धात्री के लिए।
5. स्वास्थ्य संदर्भ सेवा सभी बच्चे, गर्भवती, एवं धात्री के लिए।
6. स्वास्थ्य पोषाहार शिक्षा 15 से 45 वर्ष के आयु की महिलाओं के लिए है।
इन योजनाओं से निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति होती है ।
1. 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों को पौष्टिकता तथा स्वास्थ्य स्तर को बढ़ावा।
2. बच्चों की सही मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नीव डालना।
3. बच्चों कि मृत्यु दर, कुपोषण तथा पाठशाला को छोड़ने की प्रवृत्ति को कम करना।
4. माताओं में ऐसी भावना का विकास करना जिससे वे बच्चों के सामान्य स्वास्थ्य तथा उने आहार
संबंधी आवश्यकताओं का स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा की सहायता से ध्यान रख सके।
5 बाल संजीवनी अभियान
कुपोषण से बचाव एवं निदान हेतु मध्यप्रदेश सरकार ने सभी आंगनवाडी केंद्रो में कुपोषण से निपटने बच्चे के वजन टीकाकरण , गर्भवती स्त्री के पोषण हेतु यह योजना चलाई है । जहां पर आंगनवाडी स्थित नहीं है वहां पर गांव में सार्वजनिक स्थल पर योजना का क्रियान्वयन किया जाता है । कुपोषण से तात्पर्य भोजन में पोषक तत्वों की कमी से शरीर में जो लक्षण उत्पन्न होते है। जैसे वजन न बढ़ना। बालों का रंग भूरा हो जाना, बच्चे का चिढ़-चिढा करना व रोते रहना आदि है । प्रथम अभियान नवम्बर 2001 में प्रारंभ किया गया था ।
इस अभियान के अन्र्तगत निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाती हैं
1 वजन 0 से 5 वर्ष के बच्चे, गर्भवती
2 टीकाकरण 0 से 5 वर्ष के बच्चे,
3 गर्भवतीविटामिन ‘‘ए’’ का घोल-9 माह से 5 वर्ष के बच्चों को पिलाना।
4 स्वास्थ्य परीक्षण -बच्चे व गर्भवती
6 स्व सहायता समूह योजना
इस योजना के अंतर्गत 10-20 महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। बचत राशि के आधार पर उन्हें बैंक से लिंक कर उन्हें कर उन्हें विभिन्न आर्थिक गतिविधियों हेतु ऋण प्रदान की कार्यवाही की जाती है।
योजना का उद्देश्य महिलाओं का समाजिक, आर्थिक विकास कर उनका सशक्तिकरण करना है। गरीब महिलाओं की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने, उन्हें संगठित करने, उनका सामाजिक आर्थिक विकास कर इनका सशक्तिकरण करने की योजना है।
7 मंगल दिवस योजना
महिला बाल विकास विभाग द्वारा अप्रैल 07 से मंगल दिवस योजना का प्रारंभ किया गया है। प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र में प्रत्येक माह के प्रति मंगलवार को विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जावेगी जो निम्नानुसार है।ः-
गोद भराई कार्यक्रमः-
माह के प्रथम मंगलवार को आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को 6 माह का गर्भ होने पर आंगनबाड़ी केन्द्रों में समारोह पूर्वक कार्यक्रम आयोजित कर गर्भवती महिला की गोद भराई रस्म कर श्रीफल, सिन्दूर, चूड़ी, बिंदी, आदि भेंट स्वरूप दी जावेगी। कार्यक्रम हेतु प्रतिमाह 50/- प्रति आंगनबाड़ी केन्द्र के मान से राशि उपलब्ध करवाई जावेगी।
अन्नप्रसान कार्यक्रम:-
माह के द्वितीय मंगलवार को आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत प्रत्येक वह बच्चा जिसकी उस माह आयु पूर्ण चुकी हो ऐसे बच्चों को आंगबाड़ी केन्द्र में समारोह पूर्वक कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों का अन्नप्रसान प्रारंभ कर कटोरी, चम्मच भेंट स्वरूप दी जायेगी कार्यक्रम हेतु प्रतिमाह 50/- प्रति आंगनबाड़ी केन्द्रों के राशि उपलब्ध करवायी जावेगी।
जन्मदिवस कार्यक्रमः-
माह के तृतीय मंगलवार को आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 1 से 6 वर्ष की आयु के समस्त ऐसे बच्चे जिनका उस माह में जन्म दिवस हो, को समारोह पूर्वक कार्यक्रम आयोजित कर जन्म दिवस आंगनबाड़ी केन्द्रों में मनाया जाकर ऐसे बच्चों को पेन्सिल, चित्रकारी युक्त किताब, रबर, पानी की बाटल आदि गिफट आयटम भेंट स्वरूप दिया जायेगा। कार्यक्रम हेतु प्रतिमाह 50/- प्रति आंगनबाड़ी केन्द्रों के मान से राशि उपलब्ध करवाई जावेगी।
1ण् किशोरी बालिका दिवसः-
माह के चतुर्थ मंगलवार को आंगबाड़ी केन्द्र दर्ज किशोरी बालिकाओं का उक्त दिवस रंगोली निर्माण, सामान्य ज्ञान एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं या अन्य कोई रूचिकर कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। साथ ही आयरन, फलोरिक, एसिड गोलियों का वितरण किया जावेगा।
8 किशोरी शक्ति योजना
किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य, संतुलित भोजन व आर्थिक स्वावलंबन का प्रशिक्षण दिया जाता है। किशोरी बालिकाएॅं 11 से 18 वर्ष तक को प्रशिक्षण देने का प्रमुख लक्ष्य एनीमिया में कमी लाना एवं पारिवारिक जीवन में शिक्षा के महत्व को प्रतिस्थापित करना है ताकि किशोरियों को स्वास्थ्य, नियोजन के लाभ एवं कुपोषण की समस्या के संबंध में पता चल सके ताकि भविष्य में किशोरी कुशल गृहणी बन सके।
9 जावाली योजना-
वैष्यावृत्ति उन्मूलन हेतु जावाली योजना का संचालन किया जाता है । योजना अंतर्गत जिले में अशासकीय संस्था के माध्यम से आश्रम शाला का संचालन किया जाकर बेडिया/बांछडा सासी समुदाय के बालक बालिकाओं को कक्षा 5वी तक निःशुल्क शिक्षा सस्त्र,पुस्तकें भोजन आवास सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है ।
10 उषा किरन योजना-
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 नियम 2006 के अंतर्गत पीडिता को अधिनियम एवं नियमों के प्रावधान के तहत सभी सहायता निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी । सहायता के लिए अपने पास क आंगनवाडी केंद्र/ परियोजना अधिकारी , संरक्षण अधिकारी एकीकृत बाल विकास सेवाए/पुलिस परामर्श केंद्र/ क्षेत्रीय थाना प्रभारी/ जिला कार्यक्रम अधिकारी/ जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन दिया जा सकता है ।
11 अति गरीब महिलाओं को प्रसव पूर्व आर्थिक सहायता
आति गरीब महिलाओं को प्रसव पूर्व आर्थिक सहायता के लिए यह योजना संचालित है इसका उद्देश्य अति गरीब महिलाओं को प्रसव पूर्व स्वयं ही देखभाल और प्रसव के लिए होने वाले व्यय की कुछ हद तक प्रतिपूर्ति की जाना है । इसका लाभ अति गरीब महिला को जिसकी उम्र 19 वर्ष से अधिक हो तथा उसके केवल प्रथम दो जीवित बच्चे हो एवं उसका परिवार गरीबी रेखा के नीचे अत्यंत गरीब हो ऐसी महिलाओं को सहायता राशि 500/- रू. प्रसव के 6 माह पूर्व दी जावेगी ।
12--------------    निःशुल्क सायकल प्रदाय योजना वर्ष 
2011-12
                       उद्वेश्यः-    प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कर चुके छात्र/छात्राओं को आगे शिक्षाजारी रखने के लिये प्रोत्साहित करना ।
योजना का स्वरूप एंव कार्यक्षेत्र
       
        निःशुल्क सायकल प्रदाय योजना अतर्गत पात्र बालक,
        बालिका अथवा उसके पालक को 2400 रूपये के रेखांकित
        चेक शाला प्रबंधक एंव विकास समितिके माध्यम से प्रदाय
        किये जाएगें । सायकिल का मूल्य यदि 2400 रूपये से             अधिक होता हे अधिक राशि का भुगतान हितग्राही  बालक
        बालिका के पालक के द्वारा वहन किया जायेगा ।
       
   

पात्र हितग्राही                 ग्रामीण क्षेत्र के कक्षा 9वी में अध्ययनरत सभी प्रवर्ग के ऐसे
        बालक/बालिकाएं इस योजना से लाभान्वित होगें जिनके
        गांव में शासकीय हाईस्कूल स्थापित नहीं है तथा वे एक
        गांव से दूसरे गांव शहर में शासकीय हाईस्कूल में अध्ययन
        के लिये जाते हैं । इस योजना के अंतर्गत लाभ लेने के
        लिये पात्र होगें ।

           
    13-------------    जननी सुरक्षा योजना


उद्वेश्यः-    इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने    हेतु प्रोत्साहित किया जाता है।
पात्रता:-    उन सभी गर्भवती महिलाओं कोलाभ प्राप्त करने की पात्रता
        होगी जिनका प्रसव शासकीय अस्पताल के जनरल वार्ड में
        भर्ती रह कर कराया गया हो । मान्यता प्राप्त निजि संस्था
        मेंप्रसव कराने वाली गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने
        वाले परिवारों तथा अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग की
        महिलाओं को भी योजना से लाभ प्राप्त होगा ।

योजनाका स्वरूप एंव कार्यक्षेत्र  हितग्राही महिला को शासकीय अस्पताल के जनरल वार्ड
        में भर्ती रहकर प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र में 1400 रूपये
        तथा शहरी क्षेत्र मे 1000 रूपये की राशि दी जाती है । यह
        राशि प्रसवोपरांत एक मुश्त दी जाती है । हितग्राही महिला
        को इस योजना के अंतर्गत संस्थगत प्रसव के दौरान समस्त
        सेवायें ओषधि सामग्री आदि संबधित शासकीय संस्थान के
        द्वारा निशुल्क पदान की जाती है । इसके साथ ही गर्भवती
        महिला को अस्पताल तक पहुंचने वाली प्रोरक महिला को
        भी ग्रामीण क्षेत्र में 600 रूपये शहरी क्षेत्र में 200 रूपये
        प्रोत्साहन राशि दी जाती है । जननी सुरक्षा योजना मध्य
        प्रदेश के सभी मेडिकल कालेजों ,जिला चिकित्सालयों तथा
        अन्य सभी चिन्हाकित शासकीय अस्पतालों में जहां 24 घंटे
        प्रसव की सुविधाएं उपलव्ध है ,लागू की गई है ।


                14-------प्रसूति सहायता योजना 


        महिला अथवा पुरूष  हिता
धिकारी ,पंजीवद्व निर्माण श्रमिक
        कर पत्नि को इस योजना में  6 सप्ताह के प्रसूति अवकाश
        एंव दो सप्ताह के पितृत्व अवकाश के एवज में पांच हजार
        रूपये की सहायता देय होगी । जननी सुरक्षा योजना             अंतर्गत लाभ प्राप्त न होने की दशा में मंडल द्वारापांच हजार
        रूपये के अतिरिक्त एक हजार रूपये और देय होगा ।
        प्रसूति हितलाभ अधिकतम दो बार के प्रसव के लिये दी देय
        होगा एंव जननी सुरक्षा योजना के प्रावधानो के अनुरूप             सहायता देय होगी ।
            प्रसूति होने के दिनांक से अधिकतम 69 दिन के भीतर
        ग्रामीण क्षेत्रों के लिये जनपत पंचायत कोतथा शहरी क्षेत्रों में
        श्रम कार्यालय/नगर पालिका अथवा नगर निगम में             निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत करना होगा । ग्र्रामीण             क्षेत्रों में मुख्य कार्यापालन अधिकारी जनपद पंचायत तथा
        नगरीय क्षेत्रों के लिये जहां श्रम कार्यालय स्थित है , उस
        नगरीय क्षेत्र के लिये योजनातर्गत स्वीकृति यहायक             श्रमायुक्त/ श्रम पदाधिकारी /सहायकश्रम अधिकारी द्वारा
        दी जायेगी ।अन्य नगरीय क्षेत्रों में संबंधित मुख्य नगर
        पालिका अधिकारी/आयुक्त नगर निगम स्वीकृति हेतु सक्षम
        होगें ।

15-------------    अति गरीब महिलाओं को प्रसव पूर्व


 सहायता राशिके लिये योजना (गोद भराई)

उद्वेश्यः-    अति गरीब महिलाओं को प्रसव के पूर्व आर्थिक सहायता के
        लिये यह योजना तैयार की गई है । इस योजना का उद्वेश्य
        अति गरीब महिलाओं के प्रसव के पूर्व स्वंय की देखभाल
        और प्रसव के लिये होने वाले व्यय की कुछ हद तक             प्रतिभूति की जाना है ।
योजना का स्वरूप और कार्यक्षेत्र
        अति गरीब महिलाओं को प्रथम दो जीवित बच्चों के प्रसवो
        तक प्रति प्रसव 500 रूपये प्र्रसव पूर्व आर्थिक सहायता
        उपलव्ध कराना । योजना का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण मध्य प्रदेश
        है ।

पात्र हितग्राही:-
        योजना की सहायता के लिये पात्रता निम्नानुसार निर्धारित
        है:-
    1-    गर्भवती महिला की आयु 19 वर्ष या अधिक हो ।
    2-    सहायता राशि केवल प्रथम दो जीवित बच्चों के प्रसवों तक
        देय होगी ।
    3-    गर्भवती महिला का परिवार गरीेबी रेखा के नीचे अत्यन्त
        गरीब हो एंव अति गरीब के  लिये पूर्व कराये गये सर्वेक्षण
        में पंजीकृत हो अथवा पीला राशन कार्डधारी हो ।
    4-    सहायता राशि 500 रूपये होगी ,जो यथासंभव प्रसव के छह
        माह पूर्व दी जावेगी ।
आशा कार्यकर्ता
        आशा कार्यकर्ता है जो अपने कार्यो को अंजाम दे रही है
        और गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओ की जिन्दगियों
        को बचा रही है। वे हमारे स्वास्थय तंत्र की गुमनाम योद्वा है
        मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थय कार्यकर्ता या आशा एक
        महिला समेदाय स्वास्थय स्वंयसेवी है जो समुदाय ओर                                  स्वास्थय देखभाल सुविधाओं के बीच एक कड़ी की भूमिका
        अदा करती है । सामुदायिक कार्यकर्ता के तोर पर समुदाय
        के लोगो को सजग करने के अलावा वह सार्वजनिक स्वास्थ
        सुविधाओं के लिहाज से प्रथम सम्पर्क सूत्र होती है ।

        राष्ट्ीय स्तर पर 8.8 लाख आशा कार्यकर्ता है,जो राष्टृीय
        ग्रामीण स्वास्थय मिशन(एन0आर0एच0एम0) द्वारा समर्थित है
        वास्तव में देश के लगभग हर हिस्से में प्रत्येक एक हजार
        ग्रामीण परिवारो के लियेएक आशा है ।
        आशा का चयन ग्रामसभा द्वारा किया जाता है और
        चह अपने कार्य प्रदर्शन के आधार पर पारितोषिक की
        हकदार है। राष्ट्ीय स्तर पर 8.8 लाख ‘ आशा‘ कार्यकर्ता है
        जो राष्ट्ीय ग्रामीण स्वास्थय मिशन (एन0आर0एच0एम0)द्वारा
        समर्थित हैं । वास्तव में देश के लगभग हर हिस्से में प्रत्येक
        एक हजार ग्रामीण परिवारों के लिये एक ‘आशा‘ है ।